Saturday, September 12, 2015

भीगी पलकें सुखा रहे हैं हम

ख़ुर्शीद 'तलब' | Khursheed 'Talab' जो लिखा था मिटा रहे हैं हम अपना लहज़ा बना रहे हैं हम दार पर फिर कोई अकेला है उससे क...

उसने सर्दियों की दास्ताँ कह दी

ख़ुर्शीद 'तलब' | Khursheed 'Talab' हमने कुछ कह दिया रवानी में ठन गयी लफ़्ज और मआनी में उसने सर्दियों की दास्ताँ कह दी...

Thursday, April 23, 2015

अक्सर ख़यालों में आना आपका अच्छा लगता है

प्रकाश यादव "निर्भीक" | Prakash Yadav Nirbheek अक्सर ख़यालों में आना आपका अच्छा लगता है कुछ देर ही सही पर साथ आपका अच्छा लगता...

Wednesday, April 15, 2015

वो लड़की याद आती है

आबिद रिज़्वी अबरत | Abid Rizvi Abarat वो लड़की याद आती है [x3] वो जो ख्वाबोंं मेंं बसती थी मेरे दिल में उतरती थी वो जो मेरी हंसी मेंं अ...

Thursday, March 26, 2015

शाम की फ़िक्र में सहर से गया

फ़रहत शहज़ाद | Farhat Shahzad शाम की फ़िक्र में सहर से गया फिर न लौटा कोई जो घर से गया जिसने देखा भी आसमान की तरफ़ आज बस वो ही बाल-ओ-पर ...

Sunday, March 1, 2015

हर साँस में हरचंद महकता हुआ तू है

फ़रहत शहज़ाद | Farhat Shahzad हर साँस में हरचंद महकता हुआ तू है धड़कन का बदन हिज्र के काँटों से लहू है दिल, गिरती हुई बर्फ़ में, ढलता...